कांवड़ यात्रा 2026: बाइकों पर लौट रहे शिवभक्त, कलश कांवड़ बनी पहली पसंद; महिलाओं में भी बढ़ा उत्साह
मेरठ। सावन माह में कांवड़ यात्रा 2026 पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ आगे बढ़ रही है। इस बार दिल्ली-एनसीआर के श्रद्धालुओं के बीच 20 से 100 लीटर जल वाली कलश कांवड़ विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई है। हरिद्वार से गंगाजल लेकर लौट रहे शिवभक्त परिवार और दोस्तों के साथ बाइकों पर यात्रा कर रहे हैं, जिससे मेरठ सहित पूरा कांवड़ मार्ग ‘बम-बम भोले’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा है।
इस वर्ष कांवड़ यात्रा की खास बात यह है कि बड़ी संख्या में पूरे परिवार एक साथ जल लेकर लौट रहे हैं। कहीं जीजा-साला की जोड़ी तो कहीं कई परिवार एक साथ बाइक से यात्रा करते दिखाई दे रहे हैं। महिला श्रद्धालुओं की भागीदारी भी पहले की तुलना में अधिक देखने को मिल रही है।
रंग-बिरंगी और आकर्षक कांवड़ों के साथ श्रद्धालु अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहे हैं। कांवड़ मार्ग पर विभिन्न सामाजिक, धार्मिक और व्यापारिक संगठनों द्वारा सेवा शिविर लगाए गए हैं, जहां भोजन, शीतल पेयजल, चिकित्सा, विश्राम और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। स्वयंसेवक पूरी श्रद्धा के साथ कांवड़ियों की सेवा में जुटे हैं।
कांवड़ यात्रा को सुचारु और सुरक्षित बनाए रखने के लिए दिल्ली रोड सहित प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई है। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी लगातार यातायात और सुरक्षा व्यवस्था की निगरानी कर रहे हैं। मंदिरों, शिविरों और प्रमुख मार्गों पर श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ के बीच पूरे क्षेत्र का माहौल शिवभक्ति में रंगा नजर आ रहा है।
नीलकंठ जाने से पहले पूरी हुई मनोकामना
यात्रा के दौरान कई श्रद्धालु अपनी आस्था से जुड़े अनुभव भी साझा कर रहे हैं। गुरुग्राम निवासी सतेंद्र अपने भाई यशपाल के साथ हरिद्वार से कांवड़ लेकर लौट रहे थे। सतेंद्र ने बताया कि उनकी चार बेटियां हैं और परिवार लंबे समय से बेटे की कामना कर रहा था। इसी मन्नत के साथ वे कांवड़ लेने हरिद्वार आए थे। उन्होंने बताया कि नीलकंठ महादेव के दर्शन के लिए जाते समय घर से फोन आया कि उनके घर बेटे का जन्म हुआ है। इसे उन्होंने भगवान शिव की कृपा और अपनी मनोकामना पूरी होने का आशीर्वाद बताया।

