दल-बदल से बढ़ रही अस्थिरता राज्य के लिए घातक: हरीश रावत
देहरादून में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्रदेश की राजनीति को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि दल-बदल की बढ़ती प्रवृत्ति राज्य में अस्थिरता पैदा कर रही है, जो जनता और विकास दोनों के लिए नुकसानदायक है।
उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी ने चुनावों के दौरान अन्य दलों में तोड़फोड़ की राजनीति को बढ़ावा दिया, जिससे राजनीतिक माहौल प्रभावित हुआ। रावत ने कहा कि अब यह एक प्रवृत्ति बन गई है, जिसमें दूसरे दलों के नेताओं को शामिल कर उन्हें प्रमुखता दी जाती है, चाहे उन पर गंभीर आरोप ही क्यों न हों।
चुनाव से दूरी बनाने के सवाल पर रावत ने कहा कि पार्टी में स्पष्ट नेतृत्व उभरना जरूरी है। अगर वे खुद सक्रिय रूप से सामने रहेंगे, तो इससे भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए उन्होंने चुनावी राजनीति से थोड़ा पीछे हटने का निर्णय लिया है, हालांकि वे पार्टी के लिए काम करते रहेंगे।
उन्होंने बताया कि दल-बदल के कारण राज्य में कई बार राजनीतिक संकट खड़ा हुआ। यहां तक कि एक ही वित्तीय वर्ष में दो बार विधानसभा से वित्त विधेयक पारित करना पड़ा, जो अस्थिरता का उदाहरण है।
रावत ने यह भी कहा कि राजनीति में युवाओं को पर्याप्त अवसर नहीं मिल पा रहा है, जिससे राज्य को नुकसान हो रहा है। उन्होंने नई पीढ़ी को आगे लाने और उनकी प्रतिभा को निखारने पर जोर दिया।
अपने अनुभवों को लेकर रावत ने कहा कि वे अपने राजनीतिक और क्षेत्रीय अनुभवों को संजोकर आने वाली पीढ़ी के लिए छोड़ना चाहते हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि उनकी राजनीति में परिवारवाद या विरासत की कोई भूमिका नहीं रही है और उन्होंने हमेशा अन्य लोगों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया है।

