जनगणना के नाम पर नहीं होगी ठगी, प्रगणकों की आईडी पर होगा क्यूआर कोड
प्रदेश में शुरू होने जा रही जनगणना के दौरान ठगी की घटनाओं पर रोक लगाने के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। जनगणना के नाम पर किसी भी तरह की धोखाधड़ी न हो, इसके लिए सभी प्रगणकों (एन्यूमरेटर) को आधिकारिक पहचान पत्र (आईडी) जारी किए जाएंगे। इन आईडी कार्ड पर क्यूआर कोड अंकित होगा, जिसे मोबाइल से स्कैन कर संबंधित प्रगणक की पूरी जानकारी प्राप्त की जा सकेगी।
भारत की जनगणना के तहत होने वाली इस प्रक्रिया में केंद्र और राज्य सरकार संयुक्त रूप से कार्य कर रहे हैं। राज्य स्तर पर भी एहतियाती तैयारियां की गई हैं ताकि नागरिकों को किसी प्रकार की असुविधा या भ्रम की स्थिति का सामना न करना पड़े।
क्यूआर कोड से होगी सत्यापन की सुविधा
जनगणना निदेशक ईवा आशीष श्रीवास्तव ने बताया कि प्रत्येक प्रगणक को विशेष आईडी कार्ड दिया जा रहा है। इस कार्ड पर मौजूद क्यूआर कोड को स्कैन करने पर यह जानकारी मिल जाएगी कि संबंधित व्यक्ति किस विभाग से जुड़ा है और वर्तमान में उसकी ड्यूटी कहां लगाई गई है। इससे आमजन किसी भी अज्ञात व्यक्ति से सावधान रह सकेंगे और ठगी की आशंका समाप्त होगी।
जनगणना टीम जिस क्षेत्र में पहुंचेगी, वहां के प्रधान, पार्षद, सभासद और अन्य गणमान्य व्यक्तियों के माध्यम से पहले ही सूचना प्रसारित की जाएगी, ताकि लोग अधिकृत टीम को पहचान सकें।
जानकारी रहेगी पूरी तरह गोपनीय
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के दौरान दी गई व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रहेगी। इसे न तो आरटीआई के तहत साझा किया जा सकेगा और न ही किसी पुलिस, कोर्ट या अन्य मंच पर सार्वजनिक किया जाएगा। केंद्र सरकार के पास यह जानकारी केवल सांख्यिकीय (स्टैटिस्टिकल) रूप में उपलब्ध रहेगी, न कि व्यक्ति विशेष के नाम के साथ।
विकास योजनाओं की आधारशिला
आजाद भारत में पहली जनगणना वर्ष 1951 में हुई थी। वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही जल जीवन मिशन, स्वच्छ भारत मिशन, एलपीजी वितरण और ग्रामीण विद्युतीकरण जैसी कई योजनाएं लागू की गईं। आगामी जनगणना के ताजा आंकड़े सरकार को भविष्य की विकास योजनाओं का खाका तैयार करने में मदद करेंगे।
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत प्रगणकों को ही जानकारी दें और किसी भी संदेह की स्थिति में आईडी कार्ड के क्यूआर कोड को अवश्य स्कैन कर सत्यापन करें।

