रानीखेत में टूटी 128 साल पुरानी परंपरा, खस्ताहाल सड़कों ने रोका रावण शोभायात्रा का रास्ता; गड्ढों के कारण नहीं निकली ऐतिहासिक यात्रा, लोगों में निराशा
रानीखेत, अल्मोड़ा। उत्तराखंड के रानीखेत में इस वर्ष एक ऐतिहासिक और धार्मिक परंपरा टूट गई। शहर की खस्ताहाल सड़कों और जगह-जगह बने गहरे गड्ढों के कारण 128 साल पुरानी रावण परिवार शोभायात्रा नहीं निकाली जा सकी। सड़क की खराब स्थिति के चलते रावण के पुतले को ले जाने वाली पहियों की गाड़ी के फंसने की आशंका थी। ऐसे में आयोजन समिति ने सभी सदस्यों की सहमति से इस बार शोभायात्रा नहीं निकालने का फैसला लिया। वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के रुकने से आयोजन समिति के सदस्यों और स्थानीय लोगों में निराशा है। वहीं, सड़कों की बदहाली को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं।
128 साल से चली आ रही थी शोभायात्रा की परंपरा
रानीखेत में रावण परिवार की शोभायात्रा लंबे समय से धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन का महत्वपूर्ण हिस्सा रही है। आयोजन समिति के अध्यक्ष जयंत रौतेला के अनुसार, कोविड काल को छोड़कर हर साल यह शोभायात्रा निकाली जाती रही है। इस आयोजन से क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान और दशहरा उत्सव की परंपरा जुड़ी हुई है।
हर दिशा से जुड़ रहा "उत्तराखण्ड"
लेकिन इस बार शहर की सड़कों की खराब हालत ने आयोजन के सामने मुश्किल खड़ी कर दी। सड़कों पर जगह-जगह गड्ढे होने के कारण रावण के पुतले को लेकर चलने वाली पहियों की गाड़ी के फंसने का खतरा था। गाड़ी को आगे बढ़ाने में परेशानी होने की आशंका को देखते हुए शोभायात्रा निकालना संभव नहीं माना गया। इसके बाद समिति ने आपसी सहमति से आयोजन स्थगित करने का निर्णय लिया।
स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ
खस्ताहाल सड़कों ने धार्मिक आयोजन पर लगाया ब्रेक
शहर की सड़कों पर बने गड्ढे अब केवल आम लोगों के आवागमन की समस्या नहीं रह गए हैं, बल्कि इनका असर स्थानीय धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों पर भी दिखाई देने लगा है। रावण शोभायात्रा का नहीं निकल पाना इसी समस्या का उदाहरण बनकर सामने आया है।
शोभायात्रा के लिए पुतले को विशेष गाड़ी से ले जाया जाता है। ऐसे में सड़क का समतल और सुरक्षित होना जरूरी है। खराब सड़कों पर गाड़ी के फंसने या उसे आगे बढ़ाने में परेशानी होने की आशंका के कारण आयोजन समिति ने जोखिम लेने के बजाय शोभायात्रा नहीं निकालने का फैसला किया।
स्थानीय लोगों के लिए यह स्थिति इसलिए भी निराशाजनक रही, क्योंकि यह आयोजन कई पीढ़ियों से क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा रहा है।
15 अक्तूबर की समय सीमा बीतने के बाद भी नहीं सुधरीं सड़कें
रानीखेत में सड़कों की खराब हालत को लेकर स्थानीय स्तर पर नाराजगी भी सामने आई है। व्यापार मंडल रानीखेत के निवर्तमान उपाध्यक्ष दीपक पंत ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सड़कों को गड्ढामुक्त बनाने की बात कही थी, लेकिन 15 अक्तूबर की निर्धारित समय सीमा बीतने के बाद भी शहर की सड़कों की स्थिति में सुधार नहीं हुआ।
उन्होंने कहा कि खस्ताहाल सड़कों के कारण 128 साल पुरानी रावण शोभायात्रा का नहीं निकल पाना चिंताजनक है। उनके अनुसार, धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़े आयोजन का इस तरह प्रभावित होना संबंधित विभागों के लिए विचार करने का विषय है।
धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है आयोजन
रामलीला एवं दशहरा आयोजन समिति रानीखेत के सचिव विनीत चौरसिया ने कहा कि क्षेत्र में वर्षों से रावण शोभायात्रा निकाली जाती रही है। इस बार सड़कों पर गड्ढे होने और पुतले को ले जाने वाली गाड़ी के फंसने की आशंका के चलते शोभायात्रा निकालना संभव नहीं हो पाया।
उन्होंने कहा कि यह परंपरा रानीखेत की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ी हुई है। भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा पैदा न हो, इसके लिए संबंधित विभागों को समय रहते सड़कों की मरम्मत करानी चाहिए, ताकि पारंपरिक आयोजनों में बाधा न आए।
लोक निर्माण विभाग ने दिया हॉटमिक्स कार्य शुरू करने का आश्वासन
सड़कों की स्थिति को लेकर लोक निर्माण विभाग ने सुधार कार्य शुरू करने की बात कही है। लोक निर्माण विभाग के प्रांतीय खंड रानीखेत के सहायक अभियंता (एई) अजय टम्टा के अनुसार, सड़कों पर जल्द ही हॉटमिक्स का कार्य शुरू किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि सड़क सुधारीकरण के बाद लोगों को आवागमन में सुविधा मिलेगी और यातायात अधिक सुगम हो सकेगा। सड़कों पर बने गड्ढों की समस्या से राहत मिलने के साथ ही स्थानीय निवासियों और रानीखेत आने वाले पर्यटकों को भी बेहतर सुविधा मिल सकेगी।
हालांकि, मरम्मत कार्य कब शुरू होगा और कब तक पूरा किया जाएगा, इसकी निश्चित समयसीमा उपलब्ध जानकारी में स्पष्ट नहीं है।
सड़क व्यवस्था पर उठे सवाल, अगली बार परंपरा दोहराने की उम्मीद
रानीखेत में 128 साल पुरानी रावण शोभायात्रा का नहीं निकल पाना शहर की सड़क व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है। यह घटना बताती है कि खराब बुनियादी सुविधाओं का असर आम जनजीवन के साथ-साथ धार्मिक आयोजनों और सांस्कृतिक विरासत पर भी पड़ सकता है।
अब स्थानीय लोगों की निगाहें लोक निर्माण विभाग के प्रस्तावित हॉटमिक्स कार्य पर टिकी हैं। यदि समय रहते सड़कों की मरम्मत हो जाती है, तो भविष्य में इस ऐतिहासिक शोभायात्रा को फिर से व्यवस्थित तरीके से निकालने का रास्ता साफ हो सकता है।


