आईएमपीसीएल दवा फैक्टरी निजी हाथों में गई, कर्मचारियों में बढ़ी चिंता
अल्मोड़ा जिले के मोहान स्थित इंडियन मेडिसिन्स फार्मास्युटिकल कॉरपोरेशन लिमिटेड (आईएमपीसीएल) दवा फैक्टरी को 121 करोड़ रुपये से अधिक की राशि में निजी कंपनी स्काईमैप फार्मास्युटिकल्स प्राइवेट लिमिटेड को बेच दिया गया है। वित्त मंत्रालय द्वारा रणनीतिक बिक्री को मंजूरी मिलने के बाद कर्मचारियों और स्थानीय लोगों में नाराजगी और चिंता बढ़ गई है।
आईएमपीसीएल देश की प्रमुख सरकारी आयुर्वेदिक और यूनानी दवा निर्माण इकाइयों में गिनी जाती रही है। वर्ष 2017 से शुरू हुई विनिवेश प्रक्रिया के बाद अब यह फैक्टरी पूरी तरह निजी क्षेत्र में चली गई है। मंत्रालय के अनुसार स्काईमैप फार्मास्युटिकल्स ने सबसे ऊंची बोली लगाकर लगभग 121 करोड़ रुपये में फैक्टरी खरीदी है।
कर्मचारियों की नौकरी पर संकट
फैक्टरी के निजीकरण के बाद यहां कार्यरत कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा हो गया है। बताया जा रहा है कि करीब 50 से 60 स्थायी कर्मचारियों को एक वर्ष तक नौकरी से नहीं हटाया जाएगा, लेकिन इसके बाद कंपनी अपनी नीति के अनुसार निर्णय ले सकेगी। वहीं लगभग 450 अस्थायी कर्मचारियों की स्थिति अधिक असुरक्षित मानी जा रही है।
आईएमपीसीएल में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 500 से अधिक लोगों को रोजगार मिलता है। रामनगर, मोहान, कुमेरिया, सल्ट और आसपास के ग्रामीण लंबे समय से इस फैक्टरी पर निर्भर रहे हैं।
कर्मचारियों ने जताया विरोध
फैक्टरी को निजी हाथों में सौंपने के विरोध में कर्मचारियों ने लंबे समय तक धरना-प्रदर्शन किया। कर्मचारी संगठन के अध्यक्ष जयपाल सिंह रावत ने आरोप लगाया कि कंपनी की वास्तविक संपत्ति करीब 150 करोड़ रुपये से अधिक है, जबकि कंपनी के पास लगभग 50 करोड़ रुपये की एफडी और 40 करोड़ रुपये की जीएसटी वापसी राशि भी लंबित है।
उन्होंने कहा कि इतनी लाभकारी कंपनी को कम कीमत पर बेचकर निजी खरीदार को फायदा पहुंचाया गया है। कर्मचारियों ने इस फैसले के खिलाफ आंदोलन जारी रखने और कोर्ट जाने की चेतावनी दी है।
कर्मचारी संगठन के सचिव भूपेंद्र सिंह अधिकारी ने कहा कि निजीकरण से सैकड़ों परिवारों की रोजी-रोटी खतरे में पड़ गई है। वहीं संगठन के कोषाध्यक्ष कुंदन सिंह मेहरा ने आरोप लगाया कि सरकार ने निजीकरण के जरिए अपने करीबियों को लाभ पहुंचाया है।
फैक्टरी के संरक्षक भगवती प्रसाद जोशी ने कहा कि यदि कर्मचारियों को हटाया गया तो सैकड़ों परिवार आर्थिक संकट में आ जाएंगे।

