मॉर्फ्ड सीडी मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को हाईकोर्ट से अंतरिम राहत, सीबीआई कोर्ट की कार्यवाही पर रोक

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को भाजपा विधायक राजेश मूणत से जुड़े कथित मॉर्फ्ड सीडी मामले में हाईकोर्ट से अंतरिम राहत मिली है। जस्टिस राधाकिशन अग्रवाल की एकलपीठ ने सीबीआई की विशेष अदालत में चल रही आगे की कार्यवाही पर अगली सुनवाई तक रोक लगा दी है।

भूपेश बघेल ने रायपुर स्थित सीबीआई विशेष न्यायाधीश के 24 जनवरी 2026 के उस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जिसमें पहले मिली दोषमुक्ति (डिस्चार्ज) को निरस्त करते हुए उनके खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया गया था।

सुनवाई के दौरान बघेल की ओर से अदालत को बताया गया कि पुनरीक्षण अदालत के आदेश के बाद ट्रायल कोर्ट आरोप तय करने की प्रक्रिया शुरू कर चुका है। यदि इस दौरान मुकदमे की कार्यवाही जारी रहती है, तो हाईकोर्ट में दायर याचिका का उद्देश्य प्रभावित हो सकता है। इस आधार पर ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगाने का अनुरोध किया गया, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

यह मामला वर्ष 2017 में तत्कालीन मंत्री और भाजपा विधायक राजेश मूणत की कथित रूप से मॉर्फ्ड अश्लील सीडी तैयार कर उसे प्रसारित करने तथा उनकी छवि धूमिल करने के आरोपों से जुड़ा है। जांच सीबीआई को सौंपे जाने के बाद एजेंसी ने भूपेश बघेल सहित अन्य आरोपियों के खिलाफ आपराधिक साजिश, जालसाजी, फर्जी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड के उपयोग और अश्लील सामग्री के प्रकाशन एवं प्रसारण से संबंधित धाराओं में आरोपपत्र दायर किया था।

मार्च 2025 में विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट ने पर्याप्त प्रथम दृष्टया साक्ष्य नहीं होने का हवाला देते हुए भूपेश बघेल को डिस्चार्ज कर दिया था। हालांकि जनवरी 2026 में सीबीआई के विशेष न्यायाधीश ने इस आदेश को पलटते हुए उनके खिलाफ आरोप तय करने का निर्देश दिया, जिसके बाद बघेल ने हाईकोर्ट का रुख किया।

हाईकोर्ट में बघेल की ओर से यह भी तर्क दिया गया कि पुनरीक्षण अदालत ने अपने अधिकार क्षेत्र से आगे बढ़कर न केवल डिस्चार्ज आदेश को निरस्त किया, बल्कि आरोपों की प्रकृति में भी बदलाव किया, जबकि ऐसा अधिकार उचित चरण पर केवल ट्रायल कोर्ट के पास होता है। उन्होंने यह भी कहा कि उपलब्ध साक्ष्य आरोप तय करने के लिए आवश्यक “गंभीर संदेह” का आधार नहीं बनाते।

सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने सीबीआई की विशेष अदालत में मामले की आगे की कार्यवाही पर अगली सुनवाई तक अंतरिम रोक लगा दी है।

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