देवभूमि से वैश्विक बाजार तक: उत्तराखंड के उद्योगों की बदलती तस्वीर पर विशेषज्ञों की बेबाक राय
देहरादून। राजधानी देहरादून में आयोजित अमर उजाला संवाद कार्यक्रम में उत्तराखंड के औद्योगिक विकास, निवेश की संभावनाओं और राज्य के आर्थिक भविष्य पर विशेषज्ञों ने विस्तार से चर्चा की। हरिद्वार बाईपास रोड स्थित होटल गेटवे में आयोजित इस कार्यक्रम में उद्योग, व्यापार और निवेश से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ।
उत्तराखंड के उद्योग सचिव विनय शंकर पांडेय ने कहा कि वर्ष 2003 में केंद्र सरकार द्वारा दिए गए औद्योगिक पैकेज ने राज्य में पहली औद्योगिक क्रांति की नींव रखी थी। इसके बाद कई बड़े उद्योग समूह राज्य में आए और विभिन्न सरकारों की उद्योग-अनुकूल नीतियों ने इस विकास को आगे बढ़ाया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में उत्तराखंड ने दूसरी औद्योगिक क्रांति का दौर देखा है।
पांडेय ने कहा कि सरकार का ध्यान अब पहाड़ी क्षेत्रों के स्थानीय उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने पर है। इसके लिए राज्य में 112 ग्रुप सेंटर संचालित किए जा रहे हैं, जो स्थानीय उत्पादों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने में मदद कर रहे हैं।
सीआईआई उत्तराखंड के सदस्य राहुल सिंघल ने कहा कि राज्य में उद्योगों के लिए सकारात्मक माहौल बना हुआ है। उन्होंने सिंगल विंडो सिस्टम को उद्योगों के लिए बड़ी सुविधा बताते हुए कहा कि इससे निवेशकों और कंपनियों को कार्य करने में आसानी हो रही है। उन्होंने उद्योगों के पलायन की आशंकाओं को खारिज करते हुए कहा कि राज्य से बड़े स्तर पर किसी उद्योग का पलायन नहीं हुआ है।
वहीं, पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के हेमंत कोचर ने कहा कि दिल्ली-देहरादून हाईवे और नए लॉजिस्टिक्स कॉरिडोर से उद्योगों को काफी लाभ मिला है। हालांकि उन्होंने जाम और पहाड़ी क्षेत्रों में बढ़ती भीड़भाड़ जैसी चुनौतियों पर भी चिंता जताई। उन्होंने युवाओं के कौशल विकास पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता बताई, ताकि उद्योगों को स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित मानव संसाधन उपलब्ध हो सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर नीतियों, मजबूत कनेक्टिविटी और स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने की रणनीति के चलते उत्तराखंड आने वाले वर्षों में निवेश और औद्योगिक विकास का एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।

