उत्तराखंड के 54 सरकारी इंटर कॉलेजों में प्रवक्ताओं के पद खाली, बिना विषय शिक्षकों के बोर्ड परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्र
देहरादून। उत्तराखंड में सरकारी शिक्षा व्यवस्था और शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के दावों के बीच शिक्षकों की कमी का गंभीर मामला सामने आया है। प्रदेश के 54 ऐसे राजकीय हाईस्कूलों को इंटरमीडिएट स्तर पर उच्चीकृत तो कर दिया गया, लेकिन वहां अब तक विषयवार प्रवक्ताओं की तैनाती नहीं हो पाई है। इसका सीधा असर इन विद्यालयों में पढ़ने वाले कक्षा 11 और 12 के छात्र-छात्राओं की पढ़ाई पर पड़ रहा है। बोर्ड परीक्षाएं नजदीक होने के बावजूद विद्यार्थी कई विषयों की तैयारी बिना संबंधित शिक्षकों के करने को मजबूर हैं।
स्थिति यह है कि कुछ विद्यालयों में प्रवक्ताओं के सभी स्वीकृत पद खाली पड़े हैं, जबकि कई स्कूलों में केवल चुनिंदा विषयों के शिक्षक ही उपलब्ध हैं। ऐसे में विद्यार्थियों को नियमित कक्षाओं और विषयवार मार्गदर्शन का लाभ नहीं मिल पा रहा है। शिक्षा विभाग ने फिलहाल एलटी शिक्षकों को अपने स्तर से विद्यार्थियों की पढ़ाई कराने के निर्देश दिए हैं, लेकिन इससे विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की कमी पूरी नहीं हो पा रही है।
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काशीपुर के मानपुर जीआईसी में प्रवक्ताओं के सभी 10 पद खाली
शिक्षकों की कमी की स्थिति का अंदाजा ऊधमसिंह नगर जिले के राजकीय इंटर कॉलेज मानपुर, काशीपुर से लगाया जा सकता है। यहां कक्षा 11 में 35 विद्यार्थी अध्ययनरत हैं। विद्यालय में प्रवक्ताओं के कुल 10 पद सृजित हैं, लेकिन हैरानी की बात है कि इन सभी पदों पर कोई तैनाती नहीं है। इतना ही नहीं, विद्यालय में प्रधानाचार्य का पद भी रिक्त चल रहा है।
स्वरोजगार एवं उद्यमिता योजनाएँ
ऐसे में इंटरमीडिएट के विद्यार्थियों को पढ़ाई के लिए पर्याप्त विषय शिक्षकों का सहयोग नहीं मिल पा रहा है। बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिहाज से यह स्थिति विद्यार्थियों के सामने बड़ी चुनौती बन रही है।
बंजारावाला जीआईसी में नौ पदों के सापेक्ष चार प्रवक्ता
देहरादून के राजकीय इंटर कॉलेज बंजारावाला की स्थिति भी कुछ ऐसी ही है। यहां प्रवक्ताओं के नौ पद स्वीकृत हैं, लेकिन केवल चार प्रवक्ता ही कार्यरत हैं। विशेष बात यह है कि चारों प्रवक्ता विज्ञान विषयों से संबंधित हैं।
इसका मतलब है कि अन्य विषयों के विद्यार्थियों को संबंधित विषय के प्रवक्ता उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में कला और अन्य विषयों की पढ़ाई प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है। विद्यार्थियों को कई विषयों में नियमित कक्षाएं और विशेषज्ञ शिक्षकों का मार्गदर्शन नहीं मिल पा रहा है।
सहसपुर और अन्य ब्लॉकों के स्कूलों में भी शिक्षकों की कमी
देहरादून जिले के सहसपुर ब्लॉक स्थित राजकीय इंटर कॉलेज मिसराज पट्टी में भी प्रवक्ताओं के पांच पद रिक्त बताए गए हैं। वहीं, जीआईसी मुंधान सहित प्रदेश के कई अन्य सरकारी विद्यालयों में भी प्रवक्ताओं की कमी बनी हुई है।
राजकीय शिक्षक संघ के पूर्व प्रांतीय महामंत्री रमेश पैन्यूली के अनुसार, शिक्षा विभाग ने कई हाईस्कूलों को इंटरमीडिएट स्तर पर उच्चीकृत कर दिया, लेकिन वहां संबंधित विषयों के प्रवक्ताओं की नियुक्ति नहीं की गई। इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ रहा है।
उनका कहना है कि प्रदेश में 100 से अधिक ऐसे विद्यालय हैं, जहां प्रवक्ताओं की कमी के कारण शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। कई स्कूलों में नियमित कक्षाओं का संचालन भी ठीक से नहीं हो पा रहा है।
13 जिलों के 54 स्कूलों को किया गया इंटरमीडिएट स्तर पर उच्चीकृत
प्रदेश के सभी 13 जिलों में हाईस्कूलों को उच्चीकृत कर इंटरमीडिएट स्तर तक संचालित किया गया है। लेकिन इन विद्यालयों में प्रवक्ताओं की नियुक्ति नहीं होने से उच्च कक्षाओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
जिलेवार स्थिति इस प्रकार है:
- पौड़ी जिले में 4 विद्यालय
- चमोली में 4 विद्यालय
- रुद्रप्रयाग में 3 विद्यालय
- टिहरी में 5 विद्यालय
- उत्तरकाशी में 2 विद्यालय
- देहरादून में 3 विद्यालय
- हरिद्वार में 6 विद्यालय
- अल्मोड़ा में 3 विद्यालय
- पिथौरागढ़ में 3 विद्यालय
- बागेश्वर में 2 विद्यालय
- चंपावत में 7 विद्यालय
- ऊधमसिंह नगर में 6 विद्यालय
- नैनीताल में 6 विद्यालय
इन सभी जिलों में कुल 54 विद्यालयों को इंटरमीडिएट स्तर पर उच्चीकृत किया गया है, लेकिन अब तक इनमें प्रवक्ताओं की नियमित तैनाती नहीं हो सकी है।
पहले से संचालित इंटर कॉलेजों में भी प्रवक्ताओं का संकट
शिक्षकों की कमी केवल नए उच्चीकृत विद्यालयों तक सीमित नहीं है। प्रदेश के पहले से इंटरमीडिएट स्तर पर संचालित कई राजकीय विद्यालयों में भी प्रवक्ताओं के पद रिक्त हैं। ऐसे में एक ओर नए विद्यालयों में उच्च कक्षाओं की पढ़ाई शुरू करने की व्यवस्था चुनौतीपूर्ण बनी हुई है, वहीं दूसरी ओर पुराने इंटर कॉलेज भी शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं।
इसका असर खासतौर पर उन विद्यार्थियों पर पड़ रहा है, जिन्हें बोर्ड परीक्षाओं के लिए विषयवार तैयारी, नियमित कक्षाओं और शिक्षकों के मार्गदर्शन की आवश्यकता है।
लोक सेवा आयोग से प्रवक्ता मिलने के बाद होगी तैनाती
माध्यमिक शिक्षा विभाग का कहना है कि प्रवक्ताओं की कमी दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं। राज्य लोक सेवा आयोग के माध्यम से विभाग को कुछ नए प्रवक्ता मिलने हैं। इनकी तैनाती जरूरत वाले विद्यालयों में की जाएगी।
माध्यमिक शिक्षा निदेशक विनोद सिमल्टी के अनुसार, हाईस्कूल से इंटरमीडिएट स्तर पर 54 विद्यालयों को सितंबर-अक्तूबर में उच्चीकृत किया गया है। इन विद्यालयों में जल्द से जल्द प्रवक्ताओं की तैनाती करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जब तक नियमित प्रवक्ताओं की नियुक्ति नहीं होती, तब तक एलटी शिक्षकों के माध्यम से विद्यार्थियों की पढ़ाई कराने के निर्देश दिए गए हैं।
बोर्ड परीक्षाओं से पहले शिक्षकों की तैनाती बड़ी चुनौती
बोर्ड परीक्षाओं का समय नजदीक आने के साथ ही सरकारी विद्यालयों में विषय शिक्षकों की कमी का मुद्दा महत्वपूर्ण हो गया है। इंटरमीडिएट स्तर पर उच्चीकृत किए गए विद्यालयों में विद्यार्थियों का प्रवेश तो हो गया, लेकिन उन्हें पढ़ाने के लिए आवश्यक विषय विशेषज्ञ उपलब्ध नहीं हैं।
ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बिना प्रवक्ताओं के विद्यार्थी बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी किस तरह पूरी करेंगे। शिक्षा विभाग की ओर से लोक सेवा आयोग से मिलने वाले प्रवक्ताओं की तैनाती का इंतजार किया जा रहा है। अब देखना होगा कि बोर्ड परीक्षाओं से पहले इन विद्यालयों में शिक्षकों की व्यवस्था कितनी जल्दी हो पाती है और विद्यार्थियों को नियमित पढ़ाई का लाभ कब तक मिल सकेगा।


