उत्तराखंड: तृतीय केदार तुंगनाथ धाम के कपाट 6 नवंबर को शीतकाल के लिए होंगे बंद, 8 नवंबर को मक्कूमठ पहुंचेगी भगवान की डोली, जानें पूरा कार्यक्रम
रुद्रप्रयाग, 20 अक्टूबर 2026। उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद होने की तिथि घोषित कर दी गई है। विजयदशमी के पावन पर्व पर पंचांग गणना के बाद कपाट बंद करने की तिथि निर्धारित की गई। तय कार्यक्रम के अनुसार, भगवान तुंगनाथ के मंदिर के कपाट आगामी 6 नवंबर 2026 को शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। इसके बाद भगवान की चल उत्सव विग्रह डोली विभिन्न पड़ावों से होते हुए शीतकालीन गद्दीस्थल मर्कटेश्वर मंदिर, मक्कूमठ पहुंचेगी।
विजयदशमी पर घोषित हुई कपाट बंद होने की तिथि
तृतीय केदार भगवान तुंगनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि विजयदशमी के अवसर पर घोषित की गई। मक्कूमठ स्थित मर्कटेश्वर मंदिर में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के दौरान पंचांग गणना के अनुसार कपाट बंद करने का दिन निर्धारित किया गया।
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भगवान तुंगनाथ धाम उत्तराखंड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल है। हर साल यात्रा सीजन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां भगवान शिव के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सर्दियों में ऊंचाई वाले क्षेत्र में अत्यधिक ठंड और बर्फबारी की संभावना को देखते हुए परंपरा के अनुसार मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।
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6 नवंबर को बंद होंगे तुंगनाथ धाम के कपाट
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 6 नवंबर 2026 को भगवान तुंगनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद कर दिए जाएंगे। कपाट बंद होने के बाद भगवान की चल उत्सव विग्रह डोली शीतकालीन प्रवास के लिए रवाना होगी।
डोली यात्रा के दौरान विभिन्न पड़ावों पर रात्रि विश्राम करते हुए अपने शीतकालीन गद्दीस्थल तक पहुंचेगी। इस यात्रा से जुड़ी धार्मिक परंपराओं का श्रद्धापूर्वक निर्वहन किया जाएगा।
चोपता, भनकुन होते हुए मक्कूमठ पहुंचेगी डोली
भगवान तुंगनाथ की चल उत्सव विग्रह डोली के शीतकालीन प्रवास का कार्यक्रम निर्धारित कर दिया गया है। इसके तहत डोली तीन चरणों में अपने शीतकालीन गद्दीस्थल मक्कूमठ पहुंचेगी।
- 6 नवंबर 2026: तुंगनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद भगवान की डोली रात्रि प्रवास के लिए चोपता पहुंचेगी।
- 7 नवंबर 2026: डोली चोपता से प्रस्थान कर भनकुन पहुंचेगी।
- 8 नवंबर 2026: भगवान तुंगनाथ की डोली भनकुन से चलकर मक्कूमठ स्थित मर्कटेश्वर मंदिर पहुंचेगी।
8 नवंबर को मक्कूमठ पहुंचने के बाद भगवान तुंगनाथ की चल उत्सव विग्रह डोली को शीतकालीन गद्दीस्थल पर विराजमान किया जाएगा। इसके बाद शीतकाल के दौरान यहीं भगवान की पूजा-अर्चना संपन्न होगी।
मक्कूमठ में होगी शीतकालीन पूजा-अर्चना
तुंगनाथ धाम के कपाट बंद होने के बाद श्रद्धालु शीतकालीन गद्दीस्थल मर्कटेश्वर मंदिर, मक्कूमठ में भगवान की पूजा-अर्चना कर सकेंगे। धार्मिक परंपरा के अनुसार, शीतकाल में भगवान की चल उत्सव विग्रह डोली को निर्धारित स्थल पर विराजमान किया जाता है और नियमित पूजा-विधि संपन्न होती है।
सर्दियों के दौरान तुंगनाथ क्षेत्र में मौसम प्रतिकूल होने और बर्फबारी की संभावना के चलते मंदिर तक पहुंचना कठिन हो जाता है। ऐसे में शीतकालीन पूजा की व्यवस्था श्रद्धालुओं के लिए धार्मिक परंपराओं से जुड़े रहने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
चारधाम यात्रा के साथ पंचकेदारों में भी शीतकालीन तैयारियां तेज
विजयदशमी के अवसर पर तुंगनाथ धाम के कपाट बंद होने की तिथि घोषित होने के साथ ही क्षेत्र में शीतकालीन धार्मिक व्यवस्थाओं की तैयारियां तेज हो गई हैं। 6 नवंबर को कपाट बंद होने के बाद भगवान की डोली चोपता और भनकुन होते हुए 8 नवंबर को मक्कूमठ पहुंचेगी।
इसके साथ ही तुंगनाथ धाम में इस वर्ष की यात्रा का समापन हो जाएगा और शीतकालीन गद्दीस्थल पर पूजा-अर्चना की परंपरा शुरू होगी। श्रद्धालु निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार भगवान तुंगनाथ के दर्शन और पूजा के लिए मक्कूमठ पहुंच सकेंगे।


