उत्तराखंड राज्यसभा सीट पर भाजपा बदल सकती है चेहरा, वैश्य समाज से नए नामों पर चर्चा

देहरादून। उत्तराखंड में राज्यसभा की एक सीट के लिए चुनावी हलचल तेज हो गई है। राज्यसभा सांसद नरेश बंसल का कार्यकाल 25 नवंबर को समाप्त होने वाला है। ऐसे में भाजपा के सामने नए उम्मीदवार के चयन की चुनौती है। पार्टी सामाजिक और क्षेत्रीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए इस बार नया चेहरा भी सामने ला सकती है।

राजनीतिक चर्चाओं के अनुसार, आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए भाजपा वैश्य समाज से किसी नेता को राज्यसभा भेज सकती है। हालांकि अंतिम फैसला भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व करेगा।

भाजपा में नए चेहरे को लेकर चर्चा

उत्तराखंड में भाजपा की राज्यसभा राजनीति पर नजर डालें तो पार्टी ने अब तक किसी एक चेहरे को लगातार दूसरी बार राज्यसभा भेजने की परंपरा नहीं अपनाई है। सुषमा स्वराज, मनोहर कांत ध्यानी, भगत सिंह कोश्यारी, तरुण विजय, अनिल बलूनी और नरेश बंसल जैसे नेताओं को अलग-अलग समय पर राज्यसभा का मौका मिला।

वर्तमान में डॉ. कल्पना सैनी और महेंद्र भट्ट उत्तराखंड से भाजपा के राज्यसभा सांसद हैं। नरेश बंसल का कार्यकाल नवंबर में पूरा होने के बाद एक सीट रिक्त होगी।

वैश्य समाज पर नजर

राज्य में शहरी क्षेत्रों में वैश्य समाज की महत्वपूर्ण मौजूदगी मानी जाती है। देहरादून, हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर और हल्द्वानी क्षेत्र की कई विधानसभा सीटों पर इस समाज की भागीदारी चुनावी समीकरणों को प्रभावित कर सकती है।

इसी वजह से राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि भाजपा आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए वैश्य समाज से किसी वरिष्ठ नेता को राज्यसभा भेज सकती है। हालांकि अभी किसी नाम पर आधिकारिक मुहर नहीं लगी है।

25 सितंबर को होगी कोर कमेटी की बैठक

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के अनुसार, 25 सितंबर को पार्टी की कोर कमेटी की बैठक होगी। राज्यसभा चुनाव के लिए दावेदारी करने वाले नेताओं में से तीन नामों का पैनल तैयार कर केंद्रीय नेतृत्व को भेजा जाएगा।

इसके बाद केंद्रीय नेतृत्व ही अंतिम उम्मीदवार के नाम की घोषणा करेगा। महेंद्र भट्ट ने यह भी कहा कि राज्यसभा सीट पर चेहरा बदलेगा या वर्तमान सांसद को दोबारा मौका मिलेगा, यह पैनल में शामिल नामों के आधार पर स्पष्ट होगा।

फिलहाल भाजपा के भीतर संभावित उम्मीदवारों को लेकर चर्चाएं तेज हैं और 25 सितंबर की कोर कमेटी बैठक के बाद तस्वीर कुछ और साफ होने की उम्मीद है।

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