विधानसभा चुनाव से पहले उत्तराखंड में हो सकती है जनगणना, तैयारियां तेज; हरिद्वार में ट्रायल पूरा
देहरादून। उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले जनगणना कराने की तैयारियां शुरू हो गई हैं। भारत के महारजिस्ट्रार कार्यालय की ओर से अधिकारियों को अंदरूनी तौर पर तैयार रहने के संकेत दिए गए हैं। हालांकि, जनगणना के कार्यक्रम को लेकर अभी आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं हुई है।
जनगणना के पहले चरण के तहत मकान गणना पूरी होने के बाद अब सितंबर में राज्य के हिमाच्छादित क्षेत्रों में दूसरे चरण की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बाद देशभर में अगले साल नौ से 28 फरवरी के बीच जनगणना प्रस्तावित है। उत्तराखंड में फरवरी-मार्च में विधानसभा चुनाव होने की संभावित स्थिति को देखते हुए यहां जनगणना के कार्यक्रम में बदलाव किया जा सकता है। ऐसे में नवंबर-दिसंबर में जनगणना कराने की संभावना जताई जा रही है और इसकी तैयारियां भी अंदरखाने शुरू हो गई हैं।
यदि उत्तराखंड में नवंबर-दिसंबर में जनगणना होती है, तो यह देश के अन्य राज्यों से पहले जनगणना कराने वाला पहला राज्य बन सकता है। जनगणना का ट्रायल हरिद्वार में पूरा हो चुका है। ट्रायल के दौरान करीब 40 सवाल पूछे गए थे, हालांकि अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वास्तविक जनगणना में कितने सवाल शामिल होंगे।
हिमाच्छादित 131 गांवों में सितंबर में होगी जनगणना
राज्य के रुद्रप्रयाग, चमोली, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी जिलों के 131 हिमाच्छादित गांवों तथा तीन विशेष निकायों—केदारनाथ, बदरीनाथ और गंगोत्री—में एक सितंबर से 30 सितंबर के बीच जनगणना प्रस्तावित है। इन क्षेत्रों की अनुमानित आबादी करीब 52 हजार है।
कार्यक्रम के अनुसार 17 से 31 अगस्त 2026 तक स्व-गणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) होगी। इसके बाद एक से 30 सितंबर तक वास्तविक जनसंख्या गणना की जाएगी। एक से पांच अक्तूबर तक रिविजनल राउंड होगा। इस पूरी प्रक्रिया के लिए एक अक्तूबर को संदर्भ तिथि निर्धारित की गई है।
जनगणना निदेशक इवा आशीष श्रीवास्तव के अनुसार, इस बार गणना का काम आधिकारिक सेंसस मोबाइल ऐप के माध्यम से डिजिटल तरीके से किया जाएगा। गणनाकर्मी घर-घर जाकर लोगों का डेटा एकत्र करेंगे।

