आपदा अलर्ट के लिए नई तकनीक तैयार, मानसून से पहले पूरे उत्तराखंड में होगा इस्तेमाल

देहरादून: उत्तराखंड में आपदा प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए एक नई अलर्ट प्रणाली तैयार कर ली गई है, जिसके जरिए किसी भी विशेष क्षेत्र में मौजूद लोगों को एक साथ चेतावनी संदेश भेजे जा सकेंगे। यह तकनीक खासतौर पर मानसून सीजन और आपात स्थितियों के दौरान बेहद उपयोगी साबित होगी।

आपदा प्रबंधन विभाग के अनुसार, इस प्रणाली से किसी प्रभावित इलाके के सभी मोबाइल उपभोक्ताओं तक एक साथ अलर्ट पहुंचाया जा सकेगा। इसका पहला परीक्षण 20 मार्च को किया गया था, जिसकी प्रतिक्रिया राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) और सी-डॉट को भेजी गई है।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस तकनीक को राज्य के लिए बेहद उपयोगी बताते हुए कहा कि उत्तराखंड जैसे आपदा संवेदनशील राज्य में यह एक “वरदान” साबित होगी। उन्होंने कहा कि चारधाम यात्रा और आगामी मानसून के दौरान इसका व्यापक उपयोग किया जाएगा, जिससे यात्रियों और स्थानीय लोगों को समय पर सटीक चेतावनी मिल सके।

आपदा प्रबंधन मंत्री मदन कौशिक ने भी इस पहल को “गेम-चेंजर” बताया और कहा कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से आपदा जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकेगा।

सचिव आपदा प्रबंधन विनोद कुमार सुमन के अनुसार, यह प्रणाली स्थान-विशिष्ट (लोकेशन आधारित) चेतावनी प्रसारण में सक्षम है। यानी जिस क्षेत्र में खतरा होगा, उसी क्षेत्र के मोबाइल टावर से जुड़े लोगों को स्वतः अलर्ट मिलेगा, जिससे भ्रम की स्थिति नहीं बनेगी।

उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) ने इस तकनीक के जरिए अलर्ट भेजने की सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं।

इस उपलब्धि पर मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार, अमित शाह, ज्योतिरादित्य सिंधिया और संबंधित एजेंसियों का आभार भी व्यक्त किया है।

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