उत्तराखंड में ‘एक जनपद एक खेल’ नीति का खाका तैयार, राष्ट्रीय खेलों पर फोकस
उत्तराखंड। उत्तराखंड में खेलों को बढ़ावा देने के लिए ‘एक जनपद एक खेल’ नीति का प्रारूप तैयार कर लिया गया है। इस नीति का उद्देश्य राज्य के हर जिले में एक विशेष खेल को विकसित करना और खिलाड़ियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराना है।
खेल मंत्री रेखा आर्या ने सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि आगामी 39वें राष्ट्रीय खेल की तैयारियों के लिए 24 घंटे के भीतर विस्तृत कार्ययोजना प्रस्तुत की जाए। उन्होंने राज्य के पदकों की संख्या बढ़ाने पर विशेष जोर दिया।
🎯 नीति का उद्देश्य
‘एक जनपद एक खेल’ पहल के तहत हर जिले में किसी एक खेल को प्राथमिकता देकर उसका ढांचा, प्रशिक्षण और संसाधन मजबूत किए जाएंगे। इससे स्थानीय प्रतिभाओं को पहचान और बेहतर प्रशिक्षण मिल सकेगा।
🏅 राष्ट्रीय खेलों की तैयारी
- खिलाड़ियों को गहन प्रशिक्षण देने पर जोर
- विभिन्न खेल संघों के साथ समन्वय बढ़ाने के निर्देश
- राष्ट्रीय खेलों से पहले अधिक से अधिक राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं उत्तराखंड में आयोजित कराने की योजना
सरकार ने यह भी संकेत दिया कि यदि पूर्वोत्तर राज्यों में कुछ खेलों के लिए आधारभूत सुविधाएं कम हैं, तो उत्तराखंड उन्हें सहयोग देने पर विचार कर सकता है।
🏫 स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी और योजनाएं
हल्द्वानी के गौलापार में प्रस्तावित स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी की प्रगति की समीक्षा की गई। जुलाई से शैक्षणिक सत्र शुरू करने की तैयारी है, जिसके लिए पाठ्यक्रम और नियमावली तैयार की जा रही है।
इसके अलावा, पदक विजेता खिलाड़ियों को सरकारी नौकरी देने और खेल विभाग में नए पद सृजित करने पर भी चर्चा हुई।
⚙️ योजनाओं में संशोधन
खेल मंत्री ने
- मुख्यमंत्री उदीयमान खिलाड़ी उन्नयन योजना
- मुख्यमंत्री खिलाड़ी प्रोत्साहन योजना
- संविदा प्रशिक्षक नीति
में आवश्यक संशोधन करने के निर्देश दिए, ताकि योजनाओं का लाभ खिलाड़ियों तक तेजी से पहुंच सके।
👉 कुल मिलाकर, यह नीति उत्तराखंड को खेलों में मजबूत पहचान दिलाने और राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन सुनिश्चित करने की दिशा में बड़ा कदम मानी जा रही है।

