उत्तराखंड में बनेगा साहित्य कल्याण कोष, बुजुर्ग साहित्यकारों को मिलेगी पेंशन
देहरादून: उत्तराखंड में साहित्यकारों के हित में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राज्य सरकार साहित्य कल्याण कोष की स्थापना करेगी और बुजुर्ग साहित्यकारों को पेंशन देने की योजना भी लागू की जाएगी।
भाषा मंत्री खजानदास ने सचिवालय में आयोजित समीक्षा बैठक में अधिकारियों को इन योजनाओं के लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश के युवा और बाल साहित्यकारों को प्रोत्साहित करने के लिए भी विशेष प्रयास किए जाएं।
मंत्री ने भाषा विभाग के बजट में वृद्धि पर जोर देते हुए कहा कि विभागीय ढांचे को मजबूत किया जाए। इसके तहत भाषा अध्ययन केंद्रों की स्थापना, प्रशिक्षण शिविरों का आयोजन, पुस्तक मेलों का आयोजन, साहित्य ग्राम की स्थापना और साहित्य कल्याण कोष जैसी योजनाओं को शामिल किया जाएगा।
बैठक में यह भी निर्देश दिए गए कि गढ़वाल, कुमाऊं और जौनसार बावर क्षेत्रों की पारंपरिक और पौराणिक लोकगायन परंपराओं का अभिलेखिकरण और दस्तावेजीकरण किया जाए। खासकर जौनसार बावर की प्राचीन पंडवाणी “बाकणा” जैसी लुप्त होती परंपराओं को संरक्षित करने पर जोर दिया गया।
इसके अलावा, भाषा संस्थान की साधारण सभा के गठन के लिए जिलों से साहित्यकारों के नाम भी मांगे गए हैं। सरकार का उद्देश्य प्रदेश की सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत को संरक्षित करने के साथ-साथ साहित्यकारों को आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना है।

