उत्तराखंड में बच्चों में बढ़ा मोटापा, बचाव के लिए 5-2-1-0 नियम अपनाने की सलाह
देहरादून | उत्तराखंड में छोटे बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर एक चिंताजनक आंकड़ा सामने आया है। राज्य में पांच वर्ष से कम आयु के बच्चों में मोटापे की दर बढ़कर 3.4 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि पहले यह आंकड़ा 2.1 प्रतिशत था। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते इस समस्या पर ध्यान नहीं दिया गया तो भविष्य में यह गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती है।
दरअसल आधुनिक जीवनशैली, बदलती खानपान की आदतें और तकनीक पर बढ़ती निर्भरता बच्चों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही हैं। जंक फूड, पैकेज्ड खाद्य पदार्थ, अधिक शक्कर और वसा वाले भोजन के बढ़ते सेवन के कारण बच्चों का वजन तेजी से बढ़ रहा है। इसके साथ ही मोबाइल फोन, टीवी और वीडियो गेम के कारण बच्चों की शारीरिक गतिविधियां भी कम हो गई हैं।
बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार मोटापा केवल शरीर के आकार या सौंदर्य से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि यह एक गंभीर चिकित्सीय स्थिति है। अधिक वजन वाले बच्चों में भविष्य में मधुमेह, हृदय रोग और कई अन्य स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।
ऋषिकेश स्थित हिमालयन अस्पताल के बाल रोग विभाग में तैनात और इंडियन एकेडमी ऑफ पीडियाट्रिक्स की उत्तराखंड शाखा के सचिव डॉ. राकेश कुमार ने बताया कि राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2019–21 के अनुसार राज्य में पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में अधिक वजन और मोटापे की दर 2.1 प्रतिशत से बढ़कर 3.4 प्रतिशत हो गई है।
उन्होंने बताया कि राज्य के हरिद्वार जिले में यह दर लगभग 7 प्रतिशत तक दर्ज की गई है, जो राज्य में सबसे अधिक है। यह स्थिति इस बात का संकेत है कि बच्चों के खानपान और जीवनशैली में सुधार की तत्काल आवश्यकता है।
5-2-1-0 नियम से मिल सकता है बचाव
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बच्चों में मोटापे की समस्या से बचने के लिए 5-2-1-0 नियम अपनाने की सलाह दी है। यह एक सरल और प्रभावी जीवनशैली फॉर्मूला माना जाता है, जिसे अपनाकर बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार किया जा सकता है।
5 – प्रतिदिन कम से कम पांच बार फल और सब्जियों का सेवन
2 – स्क्रीन टाइम दो घंटे से कम रखना
1 – रोजाना कम से कम एक घंटा खेलकूद या शारीरिक गतिविधि
0 – शुगर युक्त कोल्ड ड्रिंक या मीठे पेय पदार्थों का सेवन बिल्कुल नहीं
अभिभावकों की भूमिका अहम
डॉक्टरों का कहना है कि बच्चों में स्वस्थ आदतों का विकास मुख्य रूप से परिवार से ही शुरू होता है। यदि अभिभावक बच्चों को संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या और आउटडोर खेलों के लिए प्रेरित करें तो मोटापे की समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार घर में पौष्टिक भोजन, ताजे फल-सब्जियों का सेवन और फास्ट फूड से दूरी बच्चों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसके साथ ही बच्चों को मोबाइल और टीवी से दूर रखकर खेलकूद, योग और अन्य शारीरिक गतिविधियों की ओर प्रोत्साहित करना भी जरूरी है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समाज और परिवार मिलकर बच्चों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाएं और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं तो आने वाली पीढ़ी को मोटापा और उससे जुड़ी गंभीर बीमारियों से बचाया जा सकता है।

