‘शुद्धिकरण’ विवाद पर कांग्रेस का शक्ति प्रदर्शन, बारिश के बीच सीएम आवास घेराव
हल्द्वानी में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की रैली के बाद कार्यक्रम स्थल के कथित ‘शुद्धिकरण’ को लेकर उत्तराखंड की राजनीति गरमा गई है। इस मामले के विरोध में सोमवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने देहरादून में मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए कूच किया।
तेज बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता प्रदर्शन में शामिल हुए। हाथीबड़कला के पास पुलिस ने बैरिकेडिंग कर प्रदर्शनकारियों को रोकने का प्रयास किया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की भी हुई। कई प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड पर चढ़कर विरोध जताया। पुलिस ने कई कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया।
प्रदर्शन में उत्तराखंड कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी कुमारी सैलजा समेत कई वरिष्ठ नेता शामिल हुए। सैलजा ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने उत्तराखंड के लोगों की भावनाओं के साथ विश्वासघात किया है। उन्होंने कहा कि खरगे की रैली के बाद कार्यक्रम स्थल का ‘शुद्धिकरण’ कराया जाना सामाजिक भेदभाव और छुआछूत को बढ़ावा देने वाला कदम है।
कांग्रेस का आरोप है कि मामले को लेकर प्रदेश के विभिन्न पुलिस थानों में तहरीर देने के बावजूद आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज नहीं की गई। वहीं, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज किए जाने को लेकर भी कांग्रेस ने सरकार पर निशाना साधा।
प्रदर्शन के दौरान कई लोगों ने कांग्रेस की सदस्यता ली
सीएम आवास घेराव के दौरान कुमारी सैलजा और अन्य वरिष्ठ नेताओं की मौजूदगी में कई लोगों ने कांग्रेस का दामन थामा। इनमें रुड़की के पूर्व मेयर यशपाल राणा, यमकेश्वर के पूर्व प्रमुख भुवनेश खर्कवाल, हरिद्वार के पूर्व प्रधानाचार्य एवं पूर्व गन्ना समिति अध्यक्ष मनोज सैनी, पूर्व दर्जा राज्य मंत्री रामकुमार वालिया, देहरादून मंडी समिति के पूर्व अध्यक्ष रविंद्र आनंद, अधिवक्ता सचिन कुमार समेत अन्य लोग शामिल रहे।
हरीश रावत ने दिल्ली में रखा मौन व्रत
वहीं, उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने दिल्ली स्थित अपने आवास पर एक घंटे का मौन व्रत रखा। स्वास्थ्य लाभ के लिए पिछले कुछ महीनों से दिल्ली में रह रहे रावत ने कहा कि उत्तराखंड में अस्पृश्यता और अपमानजनक छुआछूत को संरक्षण देने वाली शक्तियों के खिलाफ संघर्ष में अपनी भागीदारी दर्ज कराने के लिए उन्होंने यह मौन व्रत रखा।
उन्होंने प्रार्थना की कि सामाजिक भेदभाव और छुआछूत को बढ़ावा देने वाली शक्तियों की पराजय हो।

