विश्व रिकॉर्ड से राजनीति तक: ऐसा रहा निशानेबाज जसपाल राणा का प्रेरणादायक सफर

देहरादून। भारतीय निशानेबाजी के दिग्गज और एशियाई खेलों के स्वर्णिम नायक Jaspal Rana के निधन से खेल जगत में शोक की लहर है। महज 18 वर्ष की आयु में विश्व रिकॉर्ड बनाकर अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल करने वाले जसपाल राणा ने खेल के साथ-साथ सार्वजनिक जीवन और राजनीति में भी अपनी अलग पहचान बनाई।

राणा भारत के सबसे सफल निशानेबाजों में गिने जाते थे। उन्होंने राष्ट्रमंडल खेलों और एशियाई खेलों में कई पदक जीतकर देश का गौरव बढ़ाया। विशेष रूप से 2006 Asian Games में 102 डिग्री बुखार के बावजूद तीन स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने अद्भुत साहस और समर्पण का परिचय दिया। यह उपलब्धि आज भी भारतीय खेल इतिहास की सबसे यादगार सफलताओं में शामिल है।

वर्ष 1995 के राष्ट्रमंडल खेलों में आठ स्वर्ण पदक जीतने के बाद उन्हें “गोल्डन बॉय” के नाम से पहचान मिली। यह उस समय किसी भी भारतीय निशानेबाज का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था।

खेलों के अलावा राजनीति में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रही। वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने Bharatiya Janata Party के उम्मीदवार के रूप में टिहरी गढ़वाल सीट से चुनाव लड़ा, हालांकि उन्हें जीत नहीं मिली। बाद में वर्ष 2012 के विधानसभा चुनावों के दौरान वे Indian National Congress के स्टार प्रचारक के रूप में भी नजर आए।

हाल के वर्षों में जसपाल राणा भारतीय पिस्टल निशानेबाजों के हाई-परफॉर्मेंस कोच के रूप में कार्य कर रहे थे। उन्होंने नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके मार्गदर्शन में Manu Bhaker सहित कई युवा खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल की।

हाल ही में उन्हें सीने में दर्द की शिकायत के बाद स्टेंट सर्जरी करानी पड़ी थी। वे स्वास्थ्य लाभ कर रहे थे, लेकिन उनके अचानक निधन की खबर ने खेल प्रेमियों, खिलाड़ियों और प्रशंसकों को स्तब्ध कर दिया है। जसपाल राणा का योगदान भारतीय खेल इतिहास में हमेशा याद रखा जाएगा।

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