उज्जैनी एक्सप्रेस हादसे में बड़ा खुलासा, ट्रेन में नहीं था लोको पायलट

ऋषिकेश में हुए उज्जैनी एक्सप्रेस हादसे की शुरुआती जांच में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। अधिकारियों के अनुसार घटना के समय ट्रेन में लोको पायलट मौजूद नहीं था। बताया जा रहा है कि शंटिंग मास्टर ने ट्रेन से सुरक्षा के लिए लगाए गए गुटके और चेन हटा दिए थे, जिसके बाद ट्रेन ढलान पर स्वतः चल पड़ी और हादसा हो गया।

सोमवार देर रात ऋषिकेश रेलवे स्टेशन के पास खांड गांव क्षेत्र में ट्रेन के तीन कोच और इंजन पटरी से उतर गए थे। हादसे में कोच बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। घटना के बाद रेलवे विभाग में हड़कंप मच गया और दिल्ली व मुरादाबाद से वरिष्ठ अधिकारी जांच के लिए मौके पर पहुंचे।

प्रारंभिक जांच में पता चला कि ट्रेन को मेंटेनेंस के लिए यार्ड की लाइन नंबर 10 में खड़ा किया गया था। अगले दिन सुबह ट्रेन को इंदौर के लक्ष्मीबाई नगर के लिए रवाना होना था। इसी दौरान लोको पायलट के बयान दर्ज किए गए, जिसमें उसने बताया कि हादसे के समय वह ट्रेन में मौजूद नहीं था।

जानकारी के अनुसार ट्रेन कई घंटों से खड़ी थी, जिससे उसके ब्रेक सिस्टम का प्रेशर पूरी तरह खत्म हो चुका था। ऐसे में शंटिंग मास्टर ने इंजन चालू होने और दोबारा प्रेशर बनने से पहले ही चेन और गुटके हटा दिए। यार्ड में ढलान होने के कारण ट्रेन ने तेजी पकड़ ली और पटरी से उतर गई।

रेलवे अधिकारियों ने बताया कि किसी भी ट्रेन का ब्रेकिंग सिस्टम एयर प्रेशर पर आधारित होता है। ट्रेन लंबे समय तक खड़ी रहने पर प्रेशर खत्म हो जाता है और इंजन स्टार्ट करने के बाद दोबारा पर्याप्त प्रेशर बनने में लगभग 15 से 20 मिनट लगते हैं।

मामले की जांच के लिए रेलवे ने उच्च स्तरीय संयुक्त जांच समिति गठित की है। महेश यादव ने कहा कि समिति की रिपोर्ट आने के बाद ही हादसे के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि की जाएगी।

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