तीर्थ स्थलों पर पशु क्रूरता रोकने के लिए हाईकोर्ट सख्त, कमेटी गठन के निर्देश
नैनीताल: उत्तराखंड के तीर्थ स्थलों, विशेषकर चारधाम यात्रा के दौरान पशुओं पर हो रही क्रूरता और अव्यवस्थाओं को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने इस समस्या को रोकने के लिए एक उच्च स्तरीय कमेटी गठित करने के निर्देश दिए हैं।
यह आदेश पशु प्रेमी गौरी मौलेखी, धर्मगुरु अजय गौतम और पर्यावरण प्रेमी नारायण शर्मा द्वारा दायर जनहित याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिकाकर्ताओं ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा बनाई गई एसओपी का जमीनी स्तर पर सही तरीके से पालन नहीं हो रहा है, जिससे जानवरों पर अत्याचार जारी है।
मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि गढ़वाल कमिश्नर की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई जाए। इसमें पशुपालन विभाग, संबंधित जिलों के जिलाधिकारी और जिला पंचायत प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा।
अदालत ने कहा कि यह कमेटी तीर्थ स्थलों पर जानवरों के साथ हो रहे अत्याचार को रोकने के लिए प्रभावी कदम उठाए। मामले की अगली सुनवाई दो सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।
याचिका में यह भी बताया गया कि चारधाम यात्रा में बढ़ती भीड़ के कारण न केवल जानवरों बल्कि यात्रियों को भी खाने-पीने और रहने की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। साथ ही पर्यावरण पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है।
याचिकाकर्ताओं ने कोर्ट से मांग की है कि यात्रा में श्रद्धालुओं, घोड़ों और खच्चरों की संख्या को तय कैरिंग कैपेसिटी के अनुसार नियंत्रित किया जाए, ताकि सभी को उचित सुविधाएं मिल सकें और पशुओं पर हो रहे अत्याचार को रोका जा सके।

