जनरल बीसी खंडूड़ी: सेना से राजनीति तक जनसेवा का सफर
उत्तराखंड । उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता भुवन चंद्र खंडूड़ी अब हमारे बीच नहीं रहे। उन्होंने सेना में देश सेवा करने के बाद राजनीति में आकर जनसेवा को अपना लक्ष्य बनाया। उनकी पहचान एक ईमानदार, अनुशासित और विकासवादी नेता के रूप में रही।
भुवन चंद्र खंडूड़ी सेना में मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद वर्ष 1991 में उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कदम रखा। उन्हें राजनीति में लाने का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को दिया जाता है। खंडूड़ी वाजपेयी के बेहद भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे।
लोकसभा पहुंचने के दो साल के भीतर ही उन्हें भाजपा का मुख्य सचेतक बना दिया गया। हालांकि 1996 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 1999 में वाजपेयी सरकार में उन्हें सड़क परिवहन मंत्री बनाया गया। उनके कार्यकाल में देशभर में सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास को नई दिशा मिली। आज भी उनके काम की सराहना की जाती है।
साल 2007 में उत्तराखंड की राजनीति में बढ़ती गुटबाजी के बीच भाजपा नेतृत्व ने उन्हें राज्य की कमान सौंपी और वे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने। उन्होंने 2007 से 2009 तक मुख्यमंत्री पद संभाला। बाद में राजनीतिक परिस्थितियों के चलते उन्हें पद छोड़ना पड़ा और रमेश पोखरियाल निशंक मुख्यमंत्री बने।
इसके बाद राज्य में भ्रष्टाचार के मामलों और राजनीतिक अस्थिरता के बीच 2011 में भाजपा नेतृत्व ने एक बार फिर खंडूड़ी पर भरोसा जताया और उन्हें दोबारा मुख्यमंत्री बनाया। 2014 में केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद उन्हें रक्षा मामलों की संसदीय समिति का अध्यक्ष भी बनाया गया।
जनरल खंडूड़ी को एक सादगीपूर्ण, साफ-सुथरी छवि वाले नेता के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने राजनीति को सेवा का माध्यम बनाया।
के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता भुवन चंद्र खंडूड़ी अब हमारे बीच नहीं रहे। उन्होंने सेना में देश सेवा करने के बाद राजनीति में आकर जनसेवा को अपना लक्ष्य बनाया। उनकी पहचान एक ईमानदार, अनुशासित और विकासवादी नेता के रूप में रही।
भुवन चंद्र खंडूड़ी सेना में मेजर जनरल के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। इसके बाद वर्ष 1991 में उन्होंने सार्वजनिक जीवन में कदम रखा। उन्हें राजनीति में लाने का श्रेय पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को दिया जाता है। खंडूड़ी वाजपेयी के बेहद भरोसेमंद नेताओं में गिने जाते थे।
लोकसभा पहुंचने के दो साल के भीतर ही उन्हें भाजपा का मुख्य सचेतक बना दिया गया। हालांकि 1996 के लोकसभा चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा, लेकिन 1999 में वाजपेयी सरकार में उन्हें सड़क परिवहन मंत्री बनाया गया। उनके कार्यकाल में देशभर में सड़कों और राष्ट्रीय राजमार्गों के विकास को नई दिशा मिली। आज भी उनके काम की सराहना की जाती है।
साल 2007 में उत्तराखंड की राजनीति में बढ़ती गुटबाजी के बीच भाजपा नेतृत्व ने उन्हें राज्य की कमान सौंपी और वे उत्तराखंड के मुख्यमंत्री बने। उन्होंने 2007 से 2009 तक मुख्यमंत्री पद संभाला। बाद में राजनीतिक परिस्थितियों के चलते उन्हें पद छोड़ना पड़ा और रमेश पोखरियाल निशंक मुख्यमंत्री बने।
इसके बाद राज्य में भ्रष्टाचार के मामलों और राजनीतिक अस्थिरता के बीच 2011 में भाजपा नेतृत्व ने एक बार फिर खंडूड़ी पर भरोसा जताया और उन्हें दोबारा मुख्यमंत्री बनाया। 2014 में केंद्र में भाजपा सरकार बनने के बाद उन्हें रक्षा मामलों की संसदीय समिति का अध्यक्ष भी बनाया गया।
जनरल खंडूड़ी को एक सादगीपूर्ण, साफ-सुथरी छवि वाले नेता के रूप में याद किया जाता है, जिन्होंने राजनीति को सेवा का माध्यम बनाया।

