उत्तराखंड में 4.53 लाख मतदाता घटे, 9 लाख वोटरों की मैपिंग अधूरी

देहरादून। उत्तराखंड में पिछले लगभग एक वर्ष के दौरान 4,53,459 मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हट गए हैं। राज्य में एक जनवरी 2025 को कुल 84,29,459 मतदाता थे, जबकि वर्तमान में यह संख्या घटकर 79,76,000 रह गई है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय के अनुसार, मृत्यु, विस्थापन, डुप्लीकेसी और अनुपस्थिति जैसी वजहों से मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं।

प्रदेश में वर्ष 2003 के बाद पहली बार विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया चल रही है। चुनाव आयोग के मुताबिक, कई ऐसे मतदाता अब भी सूची में दर्ज थे जिनकी मृत्यु हो चुकी थी या जो दूसरे स्थानों पर जा चुके थे। इसी कारण मतदाता सूची को अपडेट किया गया।

अपर मुख्य निर्वाचन अधिकारी डॉ. विजय कुमार जोगदंडे ने बताया कि एएसडी (Absent, Shifted, Dead) सूची और डुप्लीकेसी सॉफ्टवेयर की मदद से फर्जी या दोहरी प्रविष्टियों को हटाया गया। उन्होंने कहा कि यह सामान्य प्रक्रिया है और संभव है कि कुछ मतदाता दूसरे राज्यों में वापस चले गए हों।

9 लाख मतदाताओं का 2003 का रिकॉर्ड नहीं मिला

राज्य में प्री-एसआईआर के तहत बीएलओ द्वारा बड़े स्तर पर मैपिंग का काम किया गया। कुल 79.76 लाख मतदाताओं में से करीब 70 लाख की मैपिंग पूरी हो चुकी है, लेकिन 9.76 लाख मतदाताओं का वर्ष 2003 का रिकॉर्ड नहीं मिल पाया है।

अब एसआईआर प्रक्रिया के दौरान इन मतदाताओं को गणना प्रपत्र भरना होगा, जिसमें उन्हें 2003 के वोट से संबंधित जानकारी देनी होगी। यदि जानकारी नहीं दी गई या निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO) संतुष्ट नहीं हुआ, तो संबंधित मतदाता को नोटिस जारी किया जाएगा। जवाब संतोषजनक न होने पर उनका नाम मतदाता सूची से हटाया जा सकता है।

नए वोटर भी बना सकेंगे वोट

चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि एसआईआर के दौरान नए वोटर बनाने की प्रक्रिया भी जारी रहेगी। इसके लिए इच्छुक लोग फॉर्म-6 भर सकते हैं। मतदाता अपने बीएलओ से संपर्क कर या ऑनलाइन आवेदन करके नया वोटर आईडी बनवा सकते हैं।

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