फ्री डिनर के बहाने ठगी: उपभोक्ता आयोग ने हॉलिडे कंपनी को 1.40 लाख रुपये लौटाने का आदेश
देहरादून।
फ्री डिनर का लालच देकर ग्राहक को हॉलिडे मेंबरशिप बेचने और बाद में शर्तें बदलने के मामले में उपभोक्ता आयोग ने एक हॉलिडे कंपनी को कड़ी फटकार लगाई है। आयोग ने कंपनी को 45 दिनों के भीतर ग्राहक की पूरी रकम लौटाने के साथ मुआवजा और कानूनी खर्च देने का आदेश दिया है।
देहरादून निवासी जितेंद्र कुमार को जनवरी 2022 में संबंधित कंपनी ने एक होटल में फ्री डिनर के लिए आमंत्रित किया था। वहां कंपनी के सेल्स प्रतिनिधियों ने उन्हें बातों में उलझाकर 10 साल की हॉलिडे मेंबरशिप स्कीम बेच दी। मौखिक रूप से भरोसा दिलाया गया कि इस स्कीम में कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगेगा, पीक सीजन में भी होटल की सुविधा मिलेगी और खाने-पीने पर 30 प्रतिशत तक की छूट दी जाएगी।
इन वादों पर भरोसा कर जितेंद्र कुमार ने अपने क्रेडिट कार्ड से 1.40 लाख रुपये का भुगतान कर दिया। भुगतान के तुरंत बाद उनसे एक छपे हुए एग्रीमेंट पर बिना पढ़ने का मौका दिए हस्ताक्षर करवा लिए गए। बाद में घर जाकर एग्रीमेंट पढ़ने पर पता चला कि लिखित शर्तें मौखिक वादों से बिल्कुल अलग थीं।
एग्रीमेंट में हर साल 9,500 रुपये का अतिरिक्त मेंटेनेंस चार्ज अनिवार्य था और खाने-पीने पर किसी भी तरह की छूट का कोई उल्लेख नहीं था। जब जितेंद्र कुमार ने उसी रात कंपनी से पैसे वापस मांगे, तो कंपनी ने अपनी ‘नो रिफंड पॉलिसी’ का हवाला देकर इनकार कर दिया।
इसके बाद मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचा। आयोग के अध्यक्ष पुष्पेन्द्र खरे और सदस्य अल्का नेगी की पीठ ने पाया कि कंपनी ने ग्राहक को भ्रामक जानकारी देकर एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर कराए थे। आयोग ने स्पष्ट कहा कि उपभोक्ता के हितों के खिलाफ थोपी गई ऐसी शर्तें कानूनन मान्य नहीं हैं।
आयोग ने कंपनी को 1.40 लाख रुपये की पूरी राशि लौटाने के साथ मानसिक परेशानी के लिए 20 हजार रुपये और कानूनी खर्च के लिए 5 हजार रुपये अतिरिक्त भुगतान करने का आदेश दिया है। साथ ही, मुकदमा दाखिल करने की तिथि (नवंबर 2023) से भुगतान की तारीख तक छह प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देने को कहा गया है।

