होम स्टे योजना का लाभ अब केवल उत्तराखंड के स्थायी निवासियों को, बाहरी लोग नहीं करा सकेंगे पंजीकरण

देहरादून। प्रदेश में पर्यटन व्यवसाय को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने होम स्टे योजना में बड़ा बदलाव किया है। अब इस योजना का लाभ केवल उत्तराखंड के स्थायी निवासियों को ही मिलेगा। बाहरी राज्यों के लोग प्रदेश में होम स्टे योजना के तहत पंजीकरण नहीं करा सकेंगे।

कैबिनेट ने उत्तराखंड पर्यटन, यात्रा व्यवसाय, होम स्टे एवं बेड-एंड-ब्रेकफास्ट पंजीकरण नियमावली–2026 को मंजूरी दे दी है। नई नियमावली के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि राज्य के स्थायी निवासी अपने स्वामित्व वाले भवन में होम स्टे का संचालन कर सकेंगे और उन्हें बिजली व पानी के कनेक्शन पर घरेलू दरों का लाभ मिलेगा।

अब तक कोई भी व्यक्ति तीन से चार कमरों में होम स्टे पंजीकृत कर संचालन कर सकता था, जिससे सरकार को राजस्व का नुकसान हो रहा था। होम स्टे योजना में टैक्स नहीं देना पड़ता था और बिजली-पानी भी घरेलू दरों पर उपलब्ध था। इसी वजह से बाहरी लोग भी इसका व्यावसायिक लाभ उठा रहे थे।

नई व्यवस्था के तहत बाहरी क्षेत्रों के लोगों द्वारा संचालित बेड-एंड-ब्रेकफास्ट इकाइयों पर बिजली और पानी की व्यावसायिक दरें लागू होंगी। सरकार का मानना है कि इससे स्थानीय लोगों को स्वरोजगार मिलेगा और पर्यटन से जुड़ा लाभ सीधे राज्यवासियों तक पहुंचेगा।

प्रदेश में अब तक छह हजार से अधिक होम स्टे पंजीकृत हो चुके हैं। इस योजना के माध्यम से जहां स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिल रहे हैं, वहीं देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को किफायती दरों पर ठहरने की सुविधा भी उपलब्ध हो रही है। पर्यटन विभाग द्वारा होम स्टे संचालकों को मार्केटिंग और ऑनलाइन बुकिंग की सुविधा भी प्रदान की जा रही है।

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